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13 Jul 19 Dr. Ujjwal Patni Yellow Star Yellow Star Yellow Star Yellow Star Yellow Star Add Rating
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Category:Business Motivation
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फोकस नहीं है तो टैलंट कोई काम नहीं आएगा


साथियों, एक छोटी सी कहानी से शुरुआत करता हूँ। एक स्कूल बहुत मुश्किल से, सीमित साधनों के साथ चल रहा था। उस स्कूल का पूरा फोकस था कि कैसे  भी बच्चों को बेहतरीन पढ़ाई करायी जाए। इतने में उस स्कूल में एक नया टीचर आया । वो हर दिन स्कूल आता और उसको कोई ना कोई समस्या नज़र आती।

वह रोज प्रिन्सिपल या अन्य शिक्षकों के पास जाता और कहता- हमारे स्कूल का गार्डन कितना ख़राब है, हमारे टॉयलेट्स साफ नहीं है या क्लास में पंखे तेजी से नहीं चलते हैं। उसकी शिकायतें बढ़ते-बढ़ते, एयरकंडिशनर क्यों नहीं है, ऑडियो-विज़ुअल रूम क्यों नहीं हैं, थिएटर रूम, जिम क्यों नहीं है आदि तक पहुँच गयी?

प्रिंसिपल ने उससे कई बार कहा, " बच्चों को पढ़ाने में तुमको क्या सहयोग चाहिए, वह बताओ और इन सब चीजों में ध्यान लगाना छोड़ो। लेकिन वो ये सब सुनने को तैयार नहीं था और स्कूल को कोसते रहता था । इससे सबमें असंतोष फैलने लगा|

एक दिन प्रिंसिपल ने उससे कहा कि  मैं तुमको एक काम देता हूँ। यदि तुम उसे कर लेते हो तब मैं तुम्हारी मदद करूंगा और तुम्हारी सलाह भी मानूँगा। वह खुशी खुशी तैयार हो गया।

प्रिंसिपल ने उसके हाथ में ऊपर तक भरा हुआ पानी का ग्लास उसके हाथ में दिया। उससे कहा कि इस गिलास को हाथ में लेकर पूरी स्कूल के 3 चक्कर लगाकर आओ लेकिन ध्यान रहे, एक बूँद भी पानी ज़मीन पर ना गिरे।

उसको लगा, स्कूल के चक्कर लगाने में क्या बड़ी बात है और वो पानी का ग्लास लेकर चक्कर लगाने निकल पड़ा। वह मन ही मन खुश था कि आज तो मैं इनको हरा दूंगा। धीरे धीरे तीन चक्कर लगाकर वह प्रिंसिपल के केबिन में आया और बोला, "सर, एक बूँद भी ज़मीन पर नहीं गिरी।"

प्रिन्सिपल ने पूछा, जब तुम स्कूल के गोल-गोल चक्कर लगा रहे थे तब तुमको रास्ते में कौन-कौन मिला?

शिक्षक ने  कहा, "सर मुझे पता नहीं, क्योंकि मेरा पूरा फोकस गिलास और पानी पर था।

प्रिंसिपल ने पूछा कि कितनी जगह के पंखे ख़राब थे,  कहाँ पर तुमको गन्दगी ज़्यादा दिखी और किस खिड़की का कांच टूटा हुआ था?"

शिक्षक ने कहा, "सर, मेरा किसी चीज़ पर ध्यान नहीं गया क्योंकि मेरा पूरा ध्यान ग्लास के पानी को गिरने से बचाने पर था।"

प्रिंसिपल ने उसको जीवन का पाठ पढ़ते हुए कहा कि तुम्हारा पूरा फोकस था कि उस ग्लास से एक बूँद पानी ना गिरे। तुम उसमें सफल रहे और लक्ष्य हासिल किया। तुमको ना लोग नजर आए और ना ही एक भी समस्या। कल तक तुमको सिर्फ समस्या ही नजर आती थी क्योंकि तुम्हारा फोकस लक्ष्य छोड़कर अन्य चीजों पर था।


साथियों, ये मिलियन डॉलर कहानी हमें सिखाती है कि जब हमारा फोकस हमारे सबसे बड़े लक्ष्य पर होता है कि तो हमें और कुछ नजर नहीं आता है। जब हमें बहुत कुछ नजर आ रहा है तो इसका अर्थ ये है कि हमारा फोकस सही नहीं है।
महाभारत में अर्जुन से पूछा गया था कि पेड़ पर तुम्हें क्या क्या नजर आ रहा है,  क्या पत्ते, टहनियाँ, विशाल पेड़, चिड़िया नजर आ रही हैं? अर्जुन ने जवाब दिया, "मुझे सिर्फ चिड़िया की आँख नजर आ रही है जिसे मुझे भेदना है।"
अर्जुन और प्रिंसिपल एक ही बात कहना चाह रहे हैं। अपनी पूरी ऊर्जा, जुनून और ताकत एक लक्ष्य पर फोकस कर दे तो कोई बाधा आपको परेशान नहीं कर सकती । लोग क्या कह रहे हैं, इससे फर्क़ नहीं पड़ेगा। आपके पास बाहर वाली दुनिया के बारे में सोचने का समय ही नहीं रहेगा। बाहर की गॉसिप्स को सुनने का टाइम ही ना रहे। हमारे पास सीमित समय है, सीमित ऊर्जा है, सीमित साधन है इसीलिए हमारा फोकस सिर्फ हमारे लक्ष्य पर होना चाहिए| 
 
मेरे पास अक्सर व्यापार से जुड़े, राजनीति से जुड़े और समाज से जुड़े अनेक पदों के प्रस्ताव आते हैं। इन प्रस्तावों में इतना आकर्षण होता है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इन्हे तुरंत स्वीकार कर ले और जश्न भी मनाए। मैं हर बार विनम्रता से मना कर देता हूँ क्योंकि उनसे मेरा फोकस हिल जाएगा और मेरे बड़े लक्ष्य दूर छिटक जाएंगे। पावर ग्लास से कागज़ इसीलिए जलता है क्योंकि सूर्य कि किरणों को उनके माध्यम से एक जगह फोकस किया जाता है। यदि पावर ग्लास हिलता रहेगा तो सूर्य की किरणें कितनी भी तेज हो, कागज नहीं जलेगा।

एक दिन जब अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे, तो मेरा विश्वास मानिए कि वही लोग जिन्होंने आप पर उंगली उठायी थी और व्यंग्य किए थे, वही लोग आपकी तारीफ में कहेंगे कि हम तो जानते थे एक-ना-एक दिन ये ज़रूर कुछ अच्छा व बड़ा करेगा।

ये दुनिया गिरगिट की भांति रंग बदलती है। जहाँ आप सफल हुये, आपकी तारीफ़ और असफल होने पर बुराई करने लगती है। इसलिए दुनिया के हिसाब से मत चलो, दुनिया को अपने पीछे चलाओ।


यदि आप अपना सम्मान नहीं करेंगे तो दुनिया आपका सम्मान नहीं करेगी। यदि आपके पास लक्ष्य नहीं होगा, अपने समय की कीमत नहीं होगी, अपने सपने नहीं होंगे तो आपका जीवन दूसरों के लक्ष्य पूरे करते-करते खत्म हो जाएगा। हमारे एक कार्यक्रम में हम आधी रात को प्रतिभागियों से लक्ष्य बनाने को कहते हैं। एक ऐसा स्पष्ट लक्ष्य जो साफ साफ नजर आता हो। महज कोरी बात नहीं, हम उनमें नंबर डालने को कहते हैं। यदि कोई कहता है कि मैं दुनिया देखना चाहता हूँ तो हम उन्हें कहते हैं कि देशों की संख्या और उनके नाम लिखो। उस दिन के बाद उन्हें सपने दिखने लग जाते हैं और उनका फोकस स्पष्ट हो जाता है।

जब तक लक्ष्य पर फोकस नहीं होगा तो समस्याऐं बड़ी होती चली जाएंगी। लक्ष्य नहीं है तो लक्ष्य ढूंढकर बनाइये और स्वयं से पूछिये कि जीवन से मैं क्या पाना चाहता हूँ। अपने लक्ष्य पर इतना फोकस कर लो कि उसके आगे हर समस्या बौनी हो जाए।

आप कितने भी प्रतिभाशाली क्यों ना हों परंतु यदि लक्ष्य पर फोकस नहीं है तो सारा टैलंट व्यर्थ है

धन्यवाद,

डॉ उज्ज्वल पाटनी
Business Coach | Motivational Speaker
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1 Comments

shawn

Oct 31,2019 18:36

Really appreciated this Post ! what a wonderful content , keep it up . Thanks again, Learnspiration


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